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रुपा भावना में बह चली। दोनों ही वासना में लिप्त हो कर एक दूसरे के बदन से खेलने लगी थी। अंधेरा बढ़ चला था। तभी आशू ने हौले से कमरे के भीतर कदम रखा। कविता चौंक गई, वो भूल गई थी कि आशू के आने समय हो चुका है। रूपा तो कविता को बहला कर बस आशू के आने का ही इन्तज़ार कर रही थी। कविता तो लगभग नंगी ही थी, पर रुपा ने अभी भी पेटीकोट पहना हुआ तो था पर वो पूरा ही ऊपर उठा हुआ था।

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