“कविता, देख आशू आया है. . . ”
” मौ. . . मौसी, मैं तो मर गई, कुछ दो ना. . . मुझे शरम लग रही है !” कविता हड़बड़ा गई। “शरमा मत . . . ये तो मुझे रोज रात को चोदता है. . . चल आज तू चुदवा ले . . . ” रूपा ने उसे धीरज बंधाते हुये कहा। ” रूपा जी आपने तो अपना वादा पूरा कर दिया . . . वाह . . . कविता जी यदि कहेंगी तो ही कुछ करने का मजा आयेगा.