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उसके मुख से सिसकारियाँ जोर से निकल रही थी, कभी कभी तो मस्ती में चीख भी उठती थी। आशू की अंगुलियाँ चूत में भी कमाल कर रही थी। रूपा का दिल भी मचल उठा और जान करके उसने आशू का कड़कता लण्ड कविता की गाण्ड में रख दिया और आशू को कुछ कहा। आशू मुस्कुरा उठा और उसने लण्ड का जोर गाण्ड के छेद पर लगा दिया। लण्ड कविता की गाण्ड में घुसता चला गया।

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