. . ”
“आह्ह्ह, आशू जी, जोर से चोद दो ना इसे . . . बहुत दिन हो गये इसे चुदवाये . . . आह्ह. . . लगा और जोर से. . . ” कविता सीत्कार भरने लगी। कविता की गाण्ड चुदने लगी . . . कविता को आनन्द आने लगा। अब रुपा कविता के पास आ गई और उसके स्तन मुँह में भर कर चूसने लगी, कभी कभी वो उसके मुख को भी जोर से चूस लेती थी।