About:

दोनों ही अब आशू से लिपट पड़ी और उसे अपने चुम्बनों से बेहाल कर दिया। कविता तो आशू का लण्ड मुँह में भर कर बचा खुचा वीर्य भी चट गई। रूपा और कविता भी आपस में लिपट कर एक दूसरे को प्यार करने लगी. . . . . . “मां री ! . . . मत करो ना . . . गुदगुदी होती है . . . ! ” रूपा ने आह भरते हुये कहा,”दूर रहो जी. . . नीचे कुछ गड़ रहा है.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*