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. . मेरा तो मन डोल रहा है जी. . . !”

“चलो, पहले प्यास बुझा ले. . . कपड़े उतारो. . . ”

“प्यास लग रही है तो कपड़े क्यूँ उतारें भला. . . ?” रूपा ने शरमाते हुये कहा। राजेश ने धीरे से रूपा की साड़ी उतार दी . . . फिर ब्लाऊज को जबरदस्ती उतार दिया। रूपा की तरफ़ से ब्लाऊज़ उतारने का विरोध तो मात्र एक नाटक था, ब्लाऊज उतरते ही उसने अपनी उभरी हुई जवानी को हाथों से छिपाने का नाकाम प्रयास किया।

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