राजेश ने रूपा को चोदा- यह आपने इस कहानी के दूसरे भाग में पढ़ा, अब तीसरा और अंतिम भाग :
मन ही मन में वो रूपा और राजेश की चुदाई के बारे में सोच रही थी। कविता के मन में मौसा जी का लण्ड भी घूम रहा था। मौसा जी ने आज शाम को इतना घुमाया-फ़िराया और खिलाया-पिलाया पर ना तो चूतड़ों पर हाथ फ़ेरा और ना ही चूंचियों को सहलाया।