. . शरम लग रही है, अन्दर हाथ मत घुसाओ ना !” वो कसमसा कर बोली। मौसा जी ने उसके चूतड़ दबा दिये और दरार को सहलाने लगे। ऐसा करते हुये मौसा जी का लण्ड तन्ना उठा। उन्होंने गाऊन के भीतर से ही हाथ बढ़ा कर कविता के स्तन दबा दिये। कविता जानबूझ कर मौसा जी को मौसि कह रही थी। “लगता है आज आपका मन बहक रहा है. . . बस अब ! मुझे बहुत शरम लग रही है !”
मौसा जी का लण्ड ये सुन कर और फ़ूल गया और कविता को चोदने के लिये बेताब हो उठा।