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उन्होने कविता को उल्टा किया और उसके दोनों पांव चौड़ा दिये. . . उसकी गाण्ड का फ़ूल सामने दिखने लगा। कविता आनन्द के मारे सिहर गई। मौसा जी से जब नहीं रहा गया तो उन्होंने अपना पजामा उतारा और अपने फ़ूले हुये कड़क लण्ड के साथ कविता की पीठ पर चढ़ गये और अपने तन्नाये हुये लण्ड को गाण्ड के गुलाब पर रख दिया और कविता को जकड़ लिया।

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