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“हाय रे कौन. . . मौसा जी. . . ये क्या कर रहे हैं आप?” कविता ने अब उन्हें पहचानने का नाटक किया। “कविता, अब नहीं रहा जाता. . . प्लीज करने दो. . . !”

“मौसी आ जायेगी तो मैं तो मर ही जाऊंगी !”

“उसकी तबियत ठीक नहीं है, उसने नींद की गोली खा ली है और वो गहरी नींद में है। ” मौसा जी का लण्ड गाण्ड के छेद में उतर कर फ़ंस चुका था।

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