मौसाजी ने अपना लण्ड जोर से हिला कर उसमें से एक एक बूंद बाहर निकाल दी। दोनों अब बिस्तर पर निढाल पड़े थे !
रूपा ने जानबूझ कर के यह सुनहारा मौका उन दोनों को दिया था। दोनों एक बार फिर से लिपट पड़े और प्यार करने लगे। “कविता, तू शरमाती बहुत है . . . पर उससे मेरी वासना और बढ़ जाती है. . . ”
“मौसाजी, ऐसे काम में शरम तो आती ही है ना”
“हाय रे.