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क्या उसे इन पन्नों को जला देना चाहिये था जिसपर उसने अपनी कल्पना को एक काहानी की शकल में अन्जाम दिया था. तभी उसे तालाब के दूसारी तरफ़ से कुछ आवाज़ सुनाई दी. उसने अपनी बैहन की आवाज़ को तुरनत पैहचान लिया. वो तुरनत उस पेड के पीछे छिप गया जिससे आनेवाले की नज़र उस पर ना पड सके. जैसे ही उसने अपनी बैहन को देखा, जिसने एक सफ़ेद रंग की शौट्*र्स के ऊपर एक लाल रंग का टौप पैहन रखा था, उसकी आँखें बन्द हो गयी.

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