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रिया के बदले हुए व्यवहार पर राज को आश्चर्य हो राहा था. वो अब से काफ़ी दूर आ चुके थे और अन्धेरे की वजह से वो अलाव से दिखायी भी नही पड रहे थे. “कितनी सुन्दर जगह है. ” रिया ने रुकते हुए सामने दिखायी देती पाहाडियों पर नज़र डालते हुए काहा. “कितनी शान्ती और एकान्त है याहां पर. . . . . . . . है ना. ” जब रिया ने अपना सर उसके कन्धे पर रखा तो उसके बदन से उठती मैहक ने राज के लन्ड में फिर सरसारी भर दी.

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