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थोडी देर गाडी में बिलकुल शांती छायी रही. कोयी किसी से कुछ नही कैह राहा था. जय रिया की चुचियों को घूरे जा राहा था जो उसके शरीर के साथ साथ हिल रही थी. रिया जानती थी की जय उसकी चुचियों को घूर राहा है पर उसने कुछ काहा नही. उसे ये ऐहसास था की आज राज के साथ जाकर उसने जय को एक दम अकेला छोड दिया था और शायद वो उसी बात को लेकर नाराज़ था.

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