About:

“हाँ देखते हैं,” रोमा ने उसे टालते हु*ए काहा, ” राज कैह राहा था की शायद उस दिन हम जय और रिया के घर जायें. ” जब घर नज़्दीक आ गया तो रोमा की आँखें राज को ढूंडने लगी. राज को कहीं भी ना पाकर उसका दिल दूबने लगा. उसका दिल चाह राहा था की राज उसके पास होता तो वो उसका हाथ पकड तालाब किनारे तैहलने जाती. कितना अच्छा लगता है राज का हाथ पकडना.

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