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“तुम तो अपनी अपनी आँखें बन्द करो ना. . . !!” मुझे अपनी हालत पर बहुत लज्जा आने लगी थी। पर मोनू तो मुझे अब भी मेरे एक एक अंग को गहराई से देख रहा था। “कोई फ़ायदा नहीं है दीदी, ये तो सब मेरी आँखों में और मन में बस गया है। ” उसका वासनायुक्त स्वर जैसे दूर से आता हुआ सुनाई दिया। अचानक मेरी नजर उसके पजामे पर पड़ी।

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