मुझे अपनी गलती का अहसास होने लगा था . . . मुझे नहीं मालूम था कि मेरी नाटकबाजी उसे अपनी ही नजर में गिरा देगी. मैं भाग कर गयी और उसे लिपटा लिया. और उसे चूमने लगी. “संजय . . मत जाओ न . . . . . ”
“नहीं मेरा यहाँ रहना ठीक नहीं है . . . ”
“संजय . . . . . . आई ऍम सॉरी . . . . . मेरी वजह से हुआ ना . . . देखो मत जाओ .