. बस ”
“क्या . . . . हरी झंडी . . . ”
‘ये तुम्हारा जीजू . . . और ये तुम . . . खूब चुदवाओ जीजू से . . . . . . और मस्त हो जाओ ”
अंकित और मैं एक दूसरे को मुस्करा कर देख रहे थे. आँखों आँखों में इशारे हो गए थे. हम सब उठे और अपने कपड़े ठीक किए. और सोने की तय्यारी करने लगे. यह बात तब की है जब मैं ११वीं में पढ़ती थी.