. . . कि मेरी मुग्धा को किस चीज़ की जरूरत है . . ” और हंस पड़ी. “पर तुम्हारी सहमति तो चाहिए ना . . . ”
“चलो आज घर चल के देखते हैं . . . आज मन भर लेना . . . ” कविता ने भी अब साफ़ कह दिया. अंकित का घर आ चुका था. मेरा घर अभी दूर था. और कविता ने रुकने को पहले ही कह दिया था. हम सभी कमरे में गए. और बेबी को बेड पर सुला दिया.