मैंने उस से कहा – तो यह पढाई होती है स्कूल में?
तो निधि बोली,”नही सर यह मेरा नही है, मुझ तो यह यहाँ पड़ा हुआ मिला, मैं तो इस ऐसे ही देख रही थी. मैंने कहा – मुझे क्या बेवकूफ समझ रखा है, मैंने तुम्हे इसे अपने बैग से निकालते हुए देखा है और इस पर तुम्हारा नाम भी लिखा है. मेरी बात सुनकर वो चुपचाप सर झुका कर खड़ी हो गई.