दो दिन बाद सोमवार को मुझे सुनीता का फोन आया कि बबलू क्या तुम मुझे आज मिल सकते हो तो मैंने हाँ कर दी. ११ बजे हम लोग एक रेस्तौरेंट में मिले तो उसने बताया कि वैसे तो उसकी सोमवार की छुटी होती है पर आज वो घर पर झूट बोलकर सिर्फ़ मुझे मिलने आयी है। मैंने कहा – ऐसी क्या जरूरी बात है?
तो उसने कहा कि यहाँ काफी शोर गुल है, कहीं अकेले में आराम से बैठकर बात करना चाहती हूँ।