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तो मैंने कहा कि ठीक है नेहरू पार्क चलकर बैठते हैं अपनी पुरानी जगह। तो वो बोली – नहीं वहां कोई भी मुझे देख कर पहचान सकता है, तुम मुझे अपने घर ले चलो …वहां से हम दोनों घर आए … घर का ताला खोल कर हम अंदर आए और मैंने दरवाजा बंद कर लिया। …सर्दियों के दिन थे इसलिए मैंने रूम हीटर चला दिया। हम बाईक पर घर आए थे और उसे ठण्ड लग रही थी।

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