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फ़िर जब थोड़ी देर बाद उसे लगता कि मैं उसे देख रही हूँ तो मैं इस तरह खिड़की से बाहर देखती जैसे मैंने कुछ देखा ही न हो. फ़िर अचनक रास्ते में मौसम बेहद खुशगवार होने लगा आसमान में बदल छा गए मधुर मधुर हवा चलने लगी। मैंने उस से कहा कि प्लीज़ मुझे बैठने दो . खिड़की पे . . बहुत बार कहने के बाद उसने मुझे बैठने दिया.

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