खैर, मामी चाय बनाकर ले आईं और सबको देने लगीं। मुझको चाय देते हुए अपनी उंगलियों को मेरी उंगलियों से छुआ और मुस्कुराईं। और यह मौसी ने देख लिया लेकिन उसने कहा कुछ भी नहीं और अंजान बनी बैठी रही। चाय पीने के बाद मैंने मौसी से कहा- चलो, घूमने चलते हैं !
और हम दोनों घूमने चले गये। वहाँ पर मौसी मुझे मामी के बारे में बताती रहीं और मैं भी बीच बीच में पूछता रहा।