उसको देख मेरे मुँह से आह निकल गई और उसने मुझे देख लिया। मैं शरमा के, हंस के वहाँ से निकल आई, थोड़ी देर बाद मम्मी बाज़ार चली गई। तभी फोन बजा। मैं अकेली थी। फ़ोन उठाया- सुनील था ! बोला- तुम आई और देख कर मुड़ क्यूँ गई? वो भी हंस के?
मैं घबरा सी गई। वैसे मैंने कभी चुदाई का मजा पहले नहीं लिया था। लेकिन अपने बॉयफ़्रेन्ड के साथ ओरल-सेक्स, चूमा-चाटी का खेल, टॉपलेस होकर अपने चूचुक चुसवाना, यह सब मैंने किया था, यहाँ तक कि गाण्ड भी मरवाई थी।