तब मैंने कहा- घबराओ नहीं !
तो वो बोली- धीरे धीरे करना !
मैं बोला- जान ! चूत को पता भी नहीं चलेगा !
मैंने उसकी शर्ट उतार के उसकी ब्रा भी निकाल दी। माँ कसम ! चुचियाँ नहीं पहाड़ की चोटियाँ थी !
मैंने एक ऊँगली उसकी चूत के मुँह पर फिरानी शुरू की और एक हाथ से उसकी चुचियाँ दबाना शुरू किया तो वो आ अह्ह्ह ऊह्ह्ह्ह्ह् ह्ह्ह्ह्ह आऔ ऊऊऊऊऊऊ की आवाजें निकालने लगी।