. . कुछ ही देर में उसका लण्ड मेरी गांड के छेद में घुस चुका था। दर्द झेलना तो मेरी आदत बन चुकी थी। “आह रे . . . घुस गया सर . . . !”
” रानी तू कितनी अच्छी है . . . पहले कहां थी रे . . . !”
“आप ही ने मुझ गरीबन पर ध्यान नहीं दिया . . . हाय गाण्ड चुद गई रे . . . !”
” रानी . . . मैं तुझे रानी ही बना कर रखूंगा .