अचानक एक बार फिर उसने मुझे जोर से जकड लिया। मैंने अपनी गति और तेज कर दी, पूरा कमरा मेरे लंड के अन्दर-बाहर होने की फच्च्क फच्च की आवाज़ों से भरा हुआ था। अब सरोज फिर से झड़ गई थी और निढाल होकर लेट गई। अब मेरी झड़ने की बारी थी, मैं तेज-तेज़ उसे चोदे जा रहा था और मैं भी उसकी चूत में ही झड़ गया। उसकी चूत मेरे वीर्य से भर गई !
मैं सरोज के ऊपर ही लेट गया !
थोड़ी देर बाद मैं उठा, पर सरोज नहीं उठ पा रही थी।