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वो गीली हो जाती थी तो उसकी ब्रा और वक्ष दिखते थे। मैं उसके आस पास ही रहता था, बड़ी ही मादक खुशबू आती थी उसके अनछुए कमसिन जिस्म से !

एक दिन दोपहर को मैं जल्दी दुकान बंद करके और घर के बाहर का दरवाजा बंद करके अन्दर आ गया ! सरोज जाने वाली थी, मैंने उसे बहाना बना कर थोड़ी देर रुकने के लिए कहा तो वो मान गई ! मैं उससे मजाक करने लगा ! थोड़ी देर बाद वो फिर जाने लगी तो मैंने नया बहाना बनाया कि मुझे बहुत भूख लगी है और वो अपनी पसंद का कुछ अच्छा बनाकर मुझे खिलाये !

वो फिर मान गई !

मैंने सरोज से फिर मजाक करना चालू किया, इस बार उसने भी मेरे साथ मजाक किया।

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