पर मैंने भी धीरे-धीरे ही सही पर तुम्हारी तरफ़ आगे बढ़ रहा था ये तो मानोगी। और पता है, रोज हस्त-मैथुन करके तुम्हारी पैन्टी पर अपना लण्ड का रस डाल देता था, तुम्हें पता चला कुछ?
वो मुस्कुराई- सब पता है, सूखने पर भी थोड़ा तो अलग लगता है। अब ऐसे अपना क्रीम मत फ़ेंकना, मैं हूँ ना, सब खा जाऊँगी। कहीं पढ़ा है कि मर्द का रस बहुत पौष्टिक होता है।