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मैंने भी कहा कि वो संकोच ना करें, मुझे सानिया से कोई परेशानी नहीं है। बल्कि सानिया की वजह से अब मैं ज्यादा घरेलू हो गया हूँ, शाम में घर आने पर अच्छा लगता है। सानिया ही मुझे चाय पिलाती है बना कर। भाभी जी संतुष्ट हो गईं और फ़ोन काट दिया। सानिया बोली- अम्मी से तो ऐसे कह रहे थे जैसे मैं आपकी बीवी की तरह चाय पिला रही हूँ आपको?

मैंने तपाक जड़ दिया- और नहीं तो क्या? न सिर्फ़ बीवी की तरह चाय पिलाती हो, अब तो रोज़ बीवी की तरह चुदाती भी हो।

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