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साड़ी उठाते हुए, उसके जांघों को भी सहला रहा था. महेश कि हरकतें और पति के कभी भी आ सकने का डर मिलकर चंदा को कुच्छ अधिक ही उत्तेजित कर रहें थे. उसका पति वहीँ पास के कमरे में था और कभी भी आ सकता था, यह बात उसकी चूत को और गीली कर रही थी. वह भी महेश का साथ देने के लिए पलटने कि कोशिश करने लगी. लेकिन महेश उसे हिलने नहीं दे रहा था.

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