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वो तुरन्त उठा और लपक कर आ गया। पहले तो वो मेरे पास लेटा रहा… फिर बोला,”थोडी सी चादर मुझे भी दे दो……”

“अच्छा… एक ही चादर में आओगे … इरादे तो नेक है ना…” मुझे तो चुदने की लग रही थी… मैने अपनी चादर उसके ऊपर डाल दी। उसने अपना तौलिया पता नहीं कब उतार दिया था। हम दोनों के नंगे शरीर का स्पर्श हो गया…

“विजय…… हाय … तुम तो नंगे हो…”

“तुम भी तो नंगी हो…”

“हाय रे … मै मर गयी…विजय…”

… एक बार मैं फिर उससे चिपकने लगी।

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