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अंकित ये जानता था कि ये रस तो कविता का ही है. इसलिए उसने अपनी टांगे ऊँची कर के अपना पूरा लण्ड उसके मुंह में दे दिया. कविता पूरा रस गट गट करके पी गयी और अब लण्ड को चाट कर साफ़ कर रही थी. मैं निढाल सी बिस्तर पर पड़ी थी. “मजा आया मेरी रानी ” कविता बोली

“जीजू ने तो बस कमाल ही कर दिया . . इतनी जोर से चोद दिया कि पूछो मत .

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