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मेरे लंड महाराज पूरे शबाब पर थे। एकदम सर उठाये अकड़ कर खड़े थे। बुआ ने मेरा लंड हाथ में पकड़ लिया और बोली- राज. . . . . हाय. . . . . . . कितना बड़ा है तुम्हारा !

मेरा लंड अपनी तारीफ़ सुन कर और ज्यादा अकड़ गया और किसी नटखट बच्चे की तरह ठुनकने लगा। बुआ अपने कोमल कोमल हाथों से लंड को सहलाने लगी। मैंने पूछा- चूसोगी?

बुआ ने मना कर दिया फिर ना जाने क्या मन किया कि झट से लंड को पकड़ कर मुँह में ले लिया और लॉलीपोप की तरह चूसने लगी।

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