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तब मैं गाँव में रहता था। दसवीं तक पढाई कर चुका था पर गाँव में दस से आगे का स्कूल नहीं था सो आगे की पढ़ाई के लिए शहर जाना पड़ा। शहर गाँव से करीब तीस किलोमीटर था। इसलिए घर वालों ने फैसला किया कि शहर में ही कमरा ले लिया जाए नहीं तो आने जाने में बहुत समय खराब होगा। मैं शहर में कमरा ढूंढने लगा। पर जब तक कमरा मिला तब तक जिंदगी में उथल पुथल हो गई।

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