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झिनी साड़ी के भीतर से दिखने वाले उसकी छाती के क्लिवेज का तो मैं दिवाना बन गया था। और मैं भी उसे बुरी तरह से घूर कर उसे पूरी तरह से समझा देता था कि मैं तेरे कौन से अंग को निहार रहा हूं। वो बुरी तरह से झेंप जाती थी,लेकिन हाय रे उसकी शरम वो चाह कर भी मेंरे सामने अपना पल्लु ठीक नहीं कर पाती थी, और मैं उसके शर्म का भरपूर फ़ायदा उठाते हुए उसके जिस्म को घूरने का पूरा मजा लेने लगा।

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