लेकिन मैं पूरी तरह अन्जान बन कर खड़ा रहा और मां बेटे के फ़ोन पर बात को सुनने का और जबरन मुस्कुराने का नाटक करता रहा। मेंरे लिये ये लिका छिपी अब बर्दाश्त के बाहर होते जा रही थी मैं जल्द ही नतीजा हासिल करना चाह्ता था लेकिन अपने जोश पर होश का कंट्रोल जरुरी था। खैर मैने थोड़ा और प्रयास करते हुए उसकी दांई गांड़ से अपना हाथ घुमाते
हुए उसकी बाई गांड़ पर घुमाते हुए उसके कमर और पीठ पर घुमाते हुए उसके कंधो पर रख दिया जैसे दोस्तों के कंधो पर रख्ते है।