अब तक उसे पूरी तरह से यकीन हो चुका था कि मैं उसके शरीर से खेल रहा हूं। और यही मैं चाहता भी था। इस बीच मेंरी मां और भाई के बीच फ़ोन पर संवाद जारी था
मां – बेटा राज क्या तुम इस बार छुट्टी में थोड़े ज्यादा समय के लिये घर आ सकते हो?
राज – क्यों मां ?
मां – दरअसल मैं तुम से तुषार के विवाह के बारे में बात करना चाहती हूं?
राज – लेकिन मां अभी तो वो पढ़ रहा है न?
मां – हां, लेकिन समय जाते कहां पता चलता है? और फ़िर ये उसका अखीरी साल ही तो है न कालेज का? और फ़िर तुम्हारे पापा ने कह दिया है कि कालेज खत्म करने के बाद तुषार
उनका बीमा का काम ही संभालेगा सो नौकरी की चिंता जैसी कोई बात उसके साथ नहीं है।