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रश्मी के लिये राज अभी तक दूसरे दर्जे वाला ही पति ही साबित हुआ था । उसकी शादी जरुर हुई थी और उसे एक बड़े घर की बहू होने का पूरा सम्मान भी मिला था अपने ससुराल से और समाज से लेकिन पति के जिस प्यार के लिये स्त्री यम से भी लड़ने का साहस जुटा लेती है उसका एक अंश भी राज उसे नहीं दे पाया था और न ही उसके पास इसके लिये समय था और न उसकी इतनी समझ थी।

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