महेश आँखे फाड फाड के उन्हें देखने लगा. चंदा ने उसका हाथ पकड़ के अपने बूबों पर रख दिया. उन्हें दबाते ही महेश चौंक गया. इतने मुलायम बूबे! उसने उन्हें बेरहमी से मसलना शुरू कर दिया. चंदा के मुंह से सिसकारी निकाल पड़ी, बोली, “हाय. आराम से गोलू बेटा, उखाड दोगे क्या?”
“दर्द हो रहा है क्या?” महेश ने पुछा.