About:

मैं जानकर उस पर लुढ़क गई. . . . पर झिझक के मारे वापस उठ गयी. . . . । रात के ११ बज रहे थे . . . . पर नीन्द कोसों दूर थी। मैं उठी और बालकनी में आ गयी। मुन्ना ने कमरे की लाईट बुझा दी. . . . और मेरे साथ बालकनी में आ गया। सब तरफ़ अन्धेरा था. . . . दो मकान के आगे वाली स्ट्रीट लाईट जल रही थी। मेरे मन में वासना सुलग उठी थी।

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