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नुपुर अपनी चुदाई से पागल हो कर बर्बर रहीथी, “है! है! मेरे चोदु ससुरजी, क्या जोरदार धक्के मर मर कराज तुम हमे छोड़ रहे हो, क्या तुम ऐसे ही मेरे सासु जी को भिचोदते होगे? तब तो उनकी छूट अब तक फैल कर पुरा का पुरा भोस्राबन गया होगा. क्या तुम्हे अब भी सासूजी कि ढीली चुन्ची मसलने मय उनकी फैली हुए छूट को छोड़ने मी मज़ा अत है? मरो मरो और्जोर से मरो, आज तुम अपना सारा का सारा लुंड मेरी छूट मी पेल दो और्खुब रगर रगर कर छोडो मुझे.

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