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अब्मै रोज़ तुम्हारी छूट छोडा करूँगा, तुम चुद्वओगी नहुमसे?” माबोली, “आरे बेटा मैं तो तेरे लुंड कि देवानी हो गए हूँ, अब जब्चाहे जैसे चाहे तू मुझको छोड़ना रोज़ छोड़ना. अच्छा अब बाते बंदकर और मन लगा कर मेरी छूट मर. बहुत मज़ा आ रह है. “उधर बाबुजी ने भी नुपुर को मा के बगल मी लिटा कर उसकी छूट मापना लुंड दल छोड़ रहे थे.

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