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बबुजे तब मुझसे बोले, “बेटा बात बाद मी करना, अभी जो कर रहे हो वो पुरा करो. जल्दी से अपनी मा कि छूट कि मस्ती झारो. मैं तो अब नुपुर को छोड़ते छोड़ते झरने के करीब अ गया हूँ, तेराक्य हल है. ” मैं अपनी मा कि बुर मी अपना लुंड धकियाते हेबोला, “बाबुजी मेरा भी मॉल अब गिरने वाला है, क्या मैं मा कि चूटके अन्दर अपना मॉल गिरा सकता हूँ?” “बेटा वो छूट अब तेरे छोड़ने किएलिये है, तेरी मरजी तू कहाँ अपना मॉल गिर्यागा, छूट मी, गंद मी यौसकी मुँह मी.

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