वो उठ के उनसे बैग लेने बढ़ी. बैग हाथ में लेते ही, चंदर के पीछे जह्न्कने लगी, वहाँ कोई नहीं था. “बैग ले आये, भांजे को कहाँ छोड़ आये?”
“अरे आ रहा है, थोड़ी देर पहले बोलने लगा, ‘मामा, पेशाब करके आता हूँ!’. मैंने कहा घर तो आ ही गया है, घर में कर लेना. पर बोलता है. . . ” चंदर हसने लगे, “. . . बोलता है, एक सेकंड कि और देर हो गयी तो पैंट में हो जायेगी.