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मुन्ना भी उसी आग में जल रहा था। उसका खडा हुआ लन्ड अन्धेरे में भी उठा हुआ साफ़ नजर आ रहा था। कुछ देर तो वह मेरे पास खड़ा रहा . . . . फिर मेरे पीछे आ गया। उसने मेरे कन्धों पर हाथ रख दिया. . . . मैने उसे कुछ नहीं कहा. . . . बस झुरझुरी सी आ गयी। उसकी हिम्मत बढ़ी और मेरी कमर में हाथ डाल कर अपने लन्ड को मेरे चूतडों से सटा लिया।

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