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शेखर को भी अपने से १५ साल छोटी लड़की-सी औरत का आलिंगन अच्छा लग रहा था। वैसे उसके मन कोई खोट नहीं थी और ना ही वह प्रगति की मजबूरी का फायदा उठाना चाहता था। फिर भी वह चाह रहा था कि प्रगति उससे लिपटी रहे। थोड़ी देर बाद प्रगति ने थोड़ी ढील दी और बिना किसी हिचकिचाहट के अपने होंट शेखर के होंटों पर रख दिए और उसे प्यार से चूमने लगी।

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