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नंगी होने के बाद उसने शेखर के पांव छुए और खड़ी हो कर शेखर के कपड़े उतारने लगी। शेखर हक्काबक्का सा रह गया था। सब कुछ बहुत तेजी से हो रहा था और उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे। वह मंत्र-मुग्ध सा खड़ा रहा। उसके भी सारे कपड़े उतर गए थे और वह पूरा नंगा हो गया था। प्रगति घुटनों के बल बैठ गई और शेखर के लिंग को दोनों हाथों से प्रणाम किया।

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