देखा तो महेश केवल तौलिए में लिपटा पंखे के नीचे बदन सुखा रहा था. वो थोड़ी सी झेंप गयी, फिर बोली, “बेटा, चाय नाश्ता ले लो!”
महेश पलटा और हल्का सा झेंप गया. “और तुम्हारा नाश्ता मामी?”
“ला रही हूँ. साथ में करेंगे. ”
अपना नाश्ता और चाय ले कर वो लौटी. साथ में बैठकर दोनों नाश्ता खाने लगे. वो इस उधेड़बुन में थी कि बात क्या करे.